गुरुवार, 1 अगस्त 2019

सुर-२०१९-२१३ : #उन्नाव_की_बेटी_के_लिये_किया_जन_आंदोलन #न्याय_की_गुहार_हेतु_दिया_पांच_सूत्रीय_ज्ञापन





पीड़िता को न्याय दो
अपराधी को सज़ा हो

देश के ज्वलंत मुद्दे उन्नाव रेप कांड की पीड़िता को इंसाफ दिलाने आज इस तरह के नारों के साथ एक विशाल जन रैली के साथ माननीय प्रधानमंत्री के नाम लिखा एक पांच सूत्रीय मांग युक्त ज्ञापन नरसिंहपुर कलेक्टर को सौंपा गया ।

हाल ही के दिनों में देश की एक बेटी उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सीडेंट एवं उसके परिजनों को हादसे का शिकार बनाकर जिस तरह से अत्याचारों का सिलसिला जारी है । उसने समस्त देशवासियों के मन में आक्रोश के साथ ही कानून व न्याय व्यवस्था को लेकर अनेक सवाल उत्पन्न कर दिये है । अब हर बेटी खुद को असुरक्षित समझ रही है और सरकार से सवाल करना चाहती है कि कहीं अगला नम्बर उसका ही तो नहीं है ?

इसी संदर्भ में देश के माननीय प्रधानमंत्री के नाम लिखा एक ज्ञापन कलेक्टर महोदय को जिले की समस्त बेटियों, जागरूक नागरिकों व जनहितैषी समाजसेवियों के द्वारा एक जनरैली के पश्चात सौंपा गया । इस ज्ञापन में पाँच सूत्री मांग के अंतर्गत पीड़िता के लिये बेहतर इलाज की व्यवस्था व सुरक्षा, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में केस को चलाकर जल्द से जल्द न्याय, अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा, पीडिता को नौकरी व मुआवजा के अलावा उसके गिरफ्तार चाचा की रिहाई की अपील की गई है ।

आज इस ज्ञापन रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुये जिन्होंने पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिये अपनी आवाज़ उठाई व अतिशीघ्र फैसले की मांग रखी ।

इसके साथ ही देवनगर बरपानी, गोटेगांव की निवासी सबीना बी जिनकी नाबालिग बिटिया हसीना बी 17 जुलाई की रात से लापता है और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट करने के बाद अब तक उसकी कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है । उसकी बेटी की सकुशल व जल्द से जल्द खोजबीन करने हेतु भी अलग से एक ज्ञापन सौंपा गया जिसकी कार्यवाही पिछले 14-15 दिनों से आगे नहीं बढ़ी है । माता-पिता को शंका है कि इस दौरान उनका पड़ोसी भी नदारद है तो संभवतः वही उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया हो जिसमें उसके मित्र के शामिल होने की भी सम्भावना है अतः उसके दोस्त के विरुद्ध भी शिकायत दर्ज की जाये जो कि नहीं किया गया है ।
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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
अगस्त ०१, २०१९

बुधवार, 31 जुलाई 2019

सुर-२०१९-२१२ : #आम_आदमी_की_आवाज़_तीन #प्रेमचंद_मोहम्मद_रफी_और_उधम सिंह




अक्षर ज्ञान के साथ जब किताबों से पाला पड़ा तो उसके साथ ही हामिद, अलगू चौधरी, जुम्मन शेख, घीसू-माधव, धनिया, होरी, मुंशी वंशीधर, बूढी काकी जैसे कुछ बेहद सामान्य व दिल के करीबी लगते चरित्रों से परिचय हुआ और साथ ही जाना उनके रचयिता कथा सम्राट ‘प्रेमचंद’ के बारे में भी जिन्होंने समाज के आम आदमी की समस्याओं और उसके इर्द-गिर्द के माहौल में साँस लेते उन निचले तबके के लोगों पर भी अपनी कलम चलाई जो अक्सर, अछूते रह जाते और ऐसी चलाई कि उनके मनो-मस्तिष्क की गहन कन्दराओं में उमड़ने-घुमड़ने वाले विचारों को भी पन्नों पर भी उतनी ही ईमानदारी से उकेरा कि सामने नजर आने वाले दृश्यों के पीछे उन अदृश्य परतों के बीच चलने वाली उथल-पुथल को समझना मुमकिन हुआ साथ ही उनके दृढ़ चरित्र की नींव में जिन गहरे संस्कारों का योगदान उनको भी जान पाना आसान हुआ जो केन्द्रीय पात्रों की निर्णय क्षमता को मजबूती प्रदान करता जिसकी वजह से वे विषम हालातों में भी डिगे बिना जीवन मूल्यों का ह्रास नहीं होने देते और हर अत्याचार व अन्याय के खिलाफ़ खुलकर आवाज़ उठाते है ।

इसी तरह जब इतिहास में जाने का अवसर मिला तो ज्ञात हुआ कि जो कुछ भी आज हम देख रहे या जिस आज़ादी का उपभोग कर रहे वो एक दिन में या अचानक ही आधी रात में नहीं मिल गयी उसे पाने के लिये इस देश के अनगिनत वीर-वीरांगनाओं ने अपनी जान की बाजी लगा दी तब जाकर हम उन्मुक्त हवा में सांस ले सके तो इन्हीं ऐतिहासिक क्रांतिकारियों को पढ़ते हुये ये जाना कि इनके बीच अपने नाम के अनुरुप एक ऐसे जाबांज बहादुर ‘उधम सिंह’ की हैरतंगेज हकीकत का वर्णन भी है जिसने अपने देश की धरती नहीं बल्कि, विदेशी भूमि में जाकर अपने मासूम, बेकुसूर, असहाय देशवासियों के उस जघन्य हत्याकांड ‘जलियावाला’ का बदला लिया जिसे कि इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है तब आँख ही नम नहीं होती बल्कि, श्रद्धा से सर भी नत हो जाता है कि इस धरा ने ऐसे पराक्रमी सपूतों को जन्म दिया जो अपनी जान की परवाह न करते हुये भी अपने स्वाभिमान का प्रतिकार लेना जानते और दुश्मन के घर घुसकर बुलंद आवाज़ में दहाड़ते है ।

मन को सुकून पहुँचाने वाले साधनों में सबसे पहला क्रम ‘संगीत’ का आता जिसे आँखें बंद कर के सुनो तो अंतर का सारा विषाद, तनाव और सरदर्द जैसा विकार भी आने आप मिट जाता कि स्वर लहरियां कर्ण के रास्ते जब मस्तिष्क तक पहुँचती तो एक मदहोशी स्वतः ही तारी हो जाती जो भीतर चलने वाले झंझावातों को मिटाकर राहत की अनुभूति भरी देती और कब सुनने वाला नींद की आगोश में आ जाता पता न चलता कि सुरों का जादू और मखमली आवाज़ की खनक किसी रूहानी शांति से कम नहीं अगर, गाने वाले के गले में सरगम का वास हो कुछ ऐसा ही वरदान महान गायक ‘मो. रफी’ को भी प्राप्त था जिनके गाये गीतों, गज़ल व भजनों ने श्रोताओं पर ऐसा प्रभाव डाला कि वे उनकी गायिकी के दीवाने हो गये और आज तलक भी उनके तराने युवाओं की जबान से सुनने की मिल जाते व रिमिक्स करने वालों की पहली पसंद बने रहते कि जब गानों में आम आदमी के दिल व परिस्थितियों का हाल मिल जाता तो वो उसकी अपनी आवाज़ बन जाता है ।          

आज आम आदमी की इन तीनों अलहदा आवाजों का स्मरण दिवस जिसने इन्हें 31 जुलाई से इस तरह जोड़ दिया कि किसी एक को भी भूल पाना मुमकिन नहीं... तीनों को नमन... !!!

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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
जुलाई ३१, २०१९


मंगलवार, 30 जुलाई 2019

सुर-२०१९-२११ : #समय_की_मांग_सब_साथ_आओ #ओ_सोने_वालों_अब_तो_जाग_जाओ




‘न्याय’, ‘कानून’, ‘इंसाफ’ ये सभी शब्द आज मानो अपने अर्थ खोकर मजाक का विषय बन चुके है इसलिये अब तो इनको जुबान पर लाने में भी ये राहत की जगह हास्य पैदा करते कि जिस तरह इन्होने लगातार बढ़ रहे अपराधिक मामलों से अपनी फ़जीहत करवाई तो लगता कि किताबों में दर्ज मुंह छिपाने के सिवाय अब इनके लिये कोई दूसरी जगह ही नहीं बची है । दुष्कर्म के प्रकरणों में तो इसने अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो दी कि कठोर कानून बनने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों जबकि, होना था कि इन पर पूरी तरह विराम लग जाता लेकिन, दुराचारियों के हौंसलों में तो लगाम लगने की जगह लगता छूट मिल गयी हो वे तो अब हदों से आगे बढ़ते बढ़ते लोगों के घरों की दहलीज तक पहुंचने लगे है ।

सरकार बदलने के बाद होना तो ये चाहिये थी कि हर लड़की खुद को सुरक्षित महसूस करती मगर, हुआ ये कि न केवल उसके साथ दुराचार किया जा रहा बल्कि, उसके सारे परिवार को भी दिन दहाड़े खुलेआम सबके सामने मौत के घाट उतारा जा रहा और अपराधी जिसको फांसी पर लटकाया जाना था कानून उसको सरंक्षण दे रहा है । इस देश में ‘लॉ एंड आर्डर’ महज़ आम जनता को धोखा देने वाला एक शब्द जिसकी आड़ में उसको ये भरम दिलाया जाता कि सब कुछ ठीक है मगर, भीतर ही भीतर ये केवल, अमीर और शक्तिशाली लोगों को सुरक्षा प्रदान करने का काम करता इसलिये ज्यादातर आम आदमी इससे बचने का प्रयास करता और छोटी-मोटी वारदात को नजरंदाज कर आगे बढ़ जाता कि शिकायत करने पर इलज़ाम उसके ही सर मढ़ दिया जाता है ।

‘उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण’ में भी यही हुआ अव्वल तो पीड़िता की बात सुनी ही नहीं गयी जब दबाब में आकर FIR दर्ज भी की गयी तो अपराधी की जगह पिता को पकड़ लिया गया और इस तरह उसके साथ होने वाले अन्यायों का जो सिलसिला शुरू हुआ तो उसका अंत ही नहीं आ रहा जिसमें ताजा-तरीन मामला उसके उपर हुये हमले का है । एक तो वो ‘लड़की’ दूसरा ‘गरीब’ तीसरा ‘मुखर’ जो अत्याचार सहती नहीं उसके खिलाफ़ आवाज़ उठाती और सरकार को झुकाती कि उसके साथ अत्याचार करने वाले को सज़ा दिलाई जाये जिसका खामियाज़ा उसे अपने परिजनों को खोकर भुगतना पड़ता है । इस पर दुष्कर्मी ‘बाहुबली’ तो वो इंसाफ की उम्मीद किस तरह करती कि इस देश में ये आजकल अदालतों में भी मिलता कम खरीदा ज्यादा जाता है ऐसे में जिसके पास इसकी मुंहमांगी बोली लगाने रकम नहीं उसके साथ किस स्तर तक ज्यादती की जा सकती ये इस मामले में हम सबने देखा पर, अब इसके आगे इससे बुरा न देखना पड़े इसलिये सबको इस जुल्म के खिलाफ़ आवाज़ उठाने एक साथ पड़ेगा अन्यथा जब आग की लपटें आपके घर तक पहुचेंगी तो उसे बुझाने कोई मदद को साथ नहीं आयेगा इसलिये ये समय हर मतभेद व विचारधारा को त्यागकर एक बनने का है ।

किस उम्मीद से उत्तरप्रदेश की बागडोर अवाम ने एक ऐसे दल को सौंपी थी कि शायद, इसके बाद उसे जंगल राज से छुटकारा मिल जायेगा मगर, समझ में ये आया कि दल बदलते, नेता बदलते, चेहरे नये आते पर, फ़ितरत सबकी एक होती सब केवल सत्ता का सुख भोगने आते इसलिये कुर्सी से चिपके रहते नहीं तो अब तक उस विधायक को उसके अंजाम तक पहुँच जाना था । फिर भी जो अब तक न हुआ वो अब हो सकता यदि हम सब एक साथ मिलकर उसके विरुद्ध सरकार तक अपनी गुहार लगाये इतनी जोर से धमाका करें कि बहरी सरकार व अंधी इंसाफ की देवी दोनों उसे फांसी पर लटकाने मजबूर हो जाये इससे कम सज़ा हमे मंजूर नहीं है । इंसाफ जब अपने आप मिले नहीं तो उसे छीनने की जरूरत क्योंकि, ख़ामोशी से इनकी हिम्मत बढ़ती और हमारा बिखरा होना भी इनके पक्ष में जाता तो ऐसे में हम सब अगर, ऐसे हर मामले में एक साथ आगे आकर न्याय के लिये आवाज़ उठाये तो निसंदेह सामने कोई हो हम उसे झुका सकते है ।                

#Unnao_Rape_Case
#Hang_The_Rapist
#India_Wants_Justice 
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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
जुलाई ३०, २०१९

सोमवार, 29 जुलाई 2019

सुर-२०१९-२१० : #भज_मन_शिव_का_नाम #आया_द्वितीय_सावन_सोमवार



बेल पत्र
या हो अक्षत
पुष्प हो या ताम्बूल
जो भी करो प्रभु को समर्पित
मन ही मन में जपते रहो
प्रभु शिव का परम-पावन नाम
अंतर को जो करें पवित्र
तन में भी जगाये भक्ति का भाव
कर दे आत्मा निर्मल
मिटा दे भीतर भरे सारे कलुष
शिव नाम पारसमणि सम
कंकर को बना दे जो कुंदन और
प्राण फूंक जगा दे शव
हर पीड़ा मिटा दे
सारे कष्टों को कर दे दूर
आत्मदीप हो जगमग-जगमग
सर्वत्र फैलाये दिव्य प्रकाश
घोर तप से बने साधक कोहिनूर
योगबल से सधे मनोबल
अक्षम भी बन जाये पूर्ण सबल
इच्छा पूर्ति हो सकल
आदिदेव महादेव की पूजा
करें जो घर रहे उसका भरा-पूरा
सावन का आया सोमवार
प्रदोष का भी आज मिला है साथ
कर दो भक्तों आलस का त्याग
मुश्किल से होता ये संयोग
जब तन-मन हो जाते एकरूप
न जगेगा जब तक अंतःबोध
होगा न मनसा, वाचा, कर्मणा पूर्णकाम ।।
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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
जुलाई २९, २०१९

रविवार, 28 जुलाई 2019

सुर-२०१९-२०९ : #प्रकृति_का_सरंक्षण_हो_किस_तरह #उसे_नुकसान_पहुंचा_रहे_जब_हम_निरंतर




‘समाचार पत्र’ हो ‘सोशल मीडिया’ या फिर ‘न्यूज़ चैनल’ सभी ‘भारत’ के विभिन्न इलाकों में आई बाढ़ के हृदय विदारक दृश्यों से भरे पड़े जिनमें इसे ‘प्राकृतिक आपदा’ या ‘विभीषिका’ कहकर ही उल्लेखित किया जा रहा है । कोई भी ये नहीं कह या लिख रहा कि इसके लिये हम ही जिम्मेदार भूल गये कि हमने ही तो इसे आमंत्रित किया था उस दिन जब नदी-नालों को पाटकर उनके उपर अपने बड़े-बड़े आलीशान मकान बनवा लिये थे । तब नहीं सोचा कि कल जब बारिश होगी तो उस पानी को आने वाले कल के लिये कहाँ सुरक्षित रखेंगे उस वक़्त तो गृह-प्रवेश की पार्टी में लोगों को बुलाकर उसकी नुमाइश कर खुश हो रहे थे । अब जब घर में पानी भर गया तो उसे ही कोस रहे है पर, जरा एक बार सोचे तो सही कि जब हम नदी पर घर बनायेंगे तो फिर उसे घर में आने से किस तरह रोक पायेंगे काश, पहले ये ख्याल किया होता तो आज ये मुश्किल स्थिति न होती फिर भी अभी भी ये समझ ले तो बहुत देर नहीं हुई है ।

इसके बाद हो सकता स्थिति काबू से बाहर हो जाये जो अब तक नियन्त्रण में है अभी नहीं तो कभी नहीं ये ध्यान रखना होगा अन्यथा, आगे आने वाली तस्वीरें इससे भी अधिक भयावह हो सकती है । इस भीषण बाढ़ के इन दारुण चित्रों को देखकर भी यदि हम इसे कुदरत का कहर मानकर ख़ारिज कर दे तो गलती हमारी ही होगी कि प्रकृति लगातार हर मानसून में हमें इस तरह से सचेत कर रही है । फिर भी नहीं लगता कि कोई ये सोच रहा होगा उसके मन में तो यही ख्याल आ रहा होगा कि अगली प्रॉपर्टी कहाँ खरीदेगा किसी जंगल में या किसी खेत को खाली करवाकर वहां अपने बच्चों के लिये घर बनायेगा जिससे कि उसे कोई असुविधा न हो । कोई ये नहीं सोचता कि जब जंगल या खेत ही नहीं बचेंगे तो फिर साँस किस तरह लेगा या खायेगा क्या कि सबकी सोच पैसे कमाने और उसके इन्वेस्टमेंट में ही टिकी जिससे कि फ्यूचर सिक्योर हो पर, जो सबसे जरूरी जीवन के लिये उस कुदरत को बचाने के लिये किसी के जेहन में कोई विचार नहीं आता है ।

जो इसे बचाने में लगे उनको भी कोई सहयोग नहीं करता कि सब अपने में बेहद व्यस्त जबकि, जरूरत पहले सांसों के लिये ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की है न कि उसे प्रदान करने वाली हवा में जहर घोलने की जो हम सब अपनी प्रकृति विरोधी हरकतों से लगातार कर रहे है । हम प्लास्टिक के खतरों को जानने के बावजूद भी अपने घरों के सामान पर नजर नहीं डालते जिनमें से अधिकांश उसी से निर्मित हम में से कितने जिन्होंने कपड़े का थैला अपने बैग या गाड़ी में रखना शुरू किया या केवल दूसरों से अपेक्षा कि वे ही कुदरत बचाये हम तो बस, उसका उपभोग करेंगे । इसी तरह से लोग ‘ग्लोबल वार्मिंग’ की चिंता और बातें तो बड़ी करते लेकिन, ए.सी. या गाड़ी के बिना नहीं रह सकते घर में हर सदस्य का अलग-अलग ए.सी. / टी.वी. / गाड़ी इसके बाद न जाने किस मुंह से कहते इस बार गर्मी बहुत पड़ रही है । ज्यादातर किसानों ने खेती की जमीन को अधिक कीमत के लालच में बेच दिया उसके बाद सबके मुंह से यही सुनाई देता कि महंगाई लगातार बढ़ रही, खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे, गाय-भैंस कोई पालन नहीं चाहता पर, शुद्ध दूध-घी की कामना सबको तो किस तरह ये पूर्ति होगी कभी सोचा है ।   

इन सब सवालों व समस्याओं का एक ही जवाब ‘प्रकृति का सरंक्षण’ जिसके लिये सारी दुनिया में आज 28 जुलाई को ‘विश्व प्रकृति सरंक्षण दिवस’ मनाया जाता जो मनाने नहीं कुछ कर गुजरने का दिन है । जिसकी बधाई देने की नहीं बल्कि, ये कटू सच्चाई सामने रखने की आवश्यकता इसलिये इन दृश्यों के माध्यम से इसे सबके समक्ष रखने का दुस्साहस किया जिससे कि हम जानें कि जो कुछ भी अप्राकृतिक या अमानवीय हो रहा उसकी नींव कहीं न कहीं हमने ही रखी फिर उस पर बनी इमारत किस तरह से न गिरती । हम सब जंगलों-खेतों की ही नहीं बचाये बल्कि, वे सभी उपाय भी अपनाये जिनसे कुदरत को नुकसान न हो चाहे फिर वो प्लास्टिक को ‘न’ कहने की हो या पेड़-पौधे रोपने की या फिर गेजेट्स व प्रोपर्टीज को कम से कम अपनाने की या नदी-तालाबों को बचाने की जो भी सम्भव हो सब कुछ करना है । ये नहीं सोचना कि ‘डायनासोर’ लुप्त हो गये तो बाकि के न होने से क्या हो जायेगा भला… बल्कि, ये सोचना है कि उनकी तरह कहीं हम भी विलुप्त न हो जायें तभी ‘प्रकृति’ का बचाव हो सकता है ।    

#Say_No_To_Plastic
#Save_Forest_Save_Environment
#Minimize_The_Use_Of_Gadgets_Car_And_AC      
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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
जुलाई २८, २०१९

शनिवार, 27 जुलाई 2019

सुर-२०१९-२०८ : #आम_से_बने_ख़ास #मिसाइल_मैन_कलाम




अभाव, संघर्ष, गरीबी
कहने को नहीं होती अच्छी
कि, घोटना पड़ता है
अपने ही हाथों
नित ख्वाहिशों का गला
मन में उमड़ती हुई
दूसरों को देखकर जागती
कुछ पाने की ललक
जिसे भीतर दबाते-दबाते
लम्बे समय तक
हृदय में भी पड़ जाते घाव
सब में नहीं होता इतना ज्यादा सब्र
कि झेल सकें सभी झंझावात
अक्सर, विषम परिस्थितियों और
विपरीत हालातों के चलते
टूट जाते कुछ होकर लाचार
तो कुछ थाम लेते अपराध का हाथ
और कुछ बीच राह भटक जाते
महज़, चंद ही होते ऐसे
जो कठिनाइयों को बनाकर पुल
कर लेते इन दुर्दिनों को पार
मगर, रोते नहीं कभी-भी दुखी होकर
न ही बैठ जाते कहीं होकर मजबूर
न भाग्य पर फोड़ते ठीकरा
वे तो बस, अपने आप पर करते विश्वास
तो तोड़ देते पांवों की वो बेड़ियां
जो आगे बढ़ने से रोकती
अपने अलहदा कारनामों से फिर
बनाते नये-नये कीर्तिमान
ऐसे ही लोग तो रचते है इतिहास
जिस तरह आम से बने ख़ास
विज्ञान में किये अनूठे चमत्कार
कहलाये 'मिसाइल मैन'
'डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम'
आज पुण्यतिथि पर करते हम उनको
फिर एक बार दिल से सलाम ।।

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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
जुलाई २७, २०१९

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

सुर-२०१९-२०७ : #कारगिल_विजय_दिवस #बलिदानियों_का_कराये_स्मरण



आज उस जबरन थोपे गये ‘कारगिल युद्ध’ को बीस साल होने जा रहे जो उन शातिर पीठ में खंजर मारने वाले दोमुंहे पाकिस्तानियों की साजिश का अंजाम था जो हमेशा से भारत पर चोरि-छिपे आक्रमण कर उसकी जमीन को किसी भी तरह से हथियाना चाहते तो लगातार उसके लिये दुश्चक्र रचते रहते जिसमें उनको मात भी हासिल होती मगर, अपनी गलत दूषित मानसिक प्रवृति की वजह से वे इसके बावजूद भी बाज नहीं आते न ही अपनी पराजय को ही स्वीकार कर पाते बल्कि, हर हार के बाद फिर ऐसे ही जाल बिछाने में जुट जाते अपनी नाकामियों से सीखने की जगह वो इन घृणित कोशिशों में अपनी समस्त ऊर्जा व समय का व्यवय करते जो आज भी उसी तरह से जारी है ।

भारतवर्ष की यही पहचान व ख़ासियत कि उसने आज तक किसी से आगे होकर जंग नहीं लड़ी और न हो किसी को अपने कब्जे में करने जैसे हथकंडे ही रचे मगर, यदि किसी ने सामने से आकर ललकारा या युद्ध का बिगुल बजाया तो उसके बाद भी शत्रु को पहले उसने शांति का पैगाम ही भिजवाया ताकि, उन बेकुसूर व निर्दोष लोगों को बचाया जा सके जिन्हें बेवजह ही इस आपदा या विभीषिका का कोप भाजन बनना पड़ेगा उसके बाद भी अगर, दुश्मन न माने तो कफिर बचाव के लिये जो भी सम्भव वे प्रयास अवश्य करता बोले तो डिफेन्स के लिये ही हथियार उठाता और इसमें भी उसकी कोशिश रहती कि बेवजह किसी बेगुनाह को मारना न पड़े वर्तमान में की गयी सर्जिकल व एयर स्ट्राइक में भी हमारे फौजी भाइयों ने किसी सिविलियन को घायल किये बगैर अपना पराक्रम दिखाया और इस तरह से ये दोनों हमले किये गये कि जान-माल का नुकसान कम से कम हुआ जो हमारी उस मानवीयता को दर्शाता जो ऋषि-मुनियों की भूमि ‘आर्यवर्त’ का दूसरा नाम है ।

‘इंसानियत’, ‘अमन’, ‘करुणा’ के अलावा ‘क्षमा’ हमारा ऐसा गुण जिसकी वजह से हम दुश्मन की नापाक हरकतों व घटिया आदतों को जानते हुये भी एक पिता व बड़े भाई की तरह हर बार उसे माफ़ कर देते जिसका फायदा वो इस तरह से उठाता कि हमें पीठ पर जख्म पर जख्म दिये जाता कि एक जहरीला नाग जिस तरह दबोचे जाने पर भले डंसता नहीं मगर, जब मौका मिलता वार कर देता उसी तरह ये पाकिस्तान है जो है तो इसी देश का हिस्सा मगर, अपने धड़ से जुदा होते ही अपनी तहज़ीब भूल गया और उसी पुरानी फ़ितरत पर वापस आ गया जो उसकी ख़ास पहचान जिससे वो कभी बाज आयेगा या नहीं इसकी उम्मीद कम ही पर, हमें अपने सैनिकों पर पूरा यकीन कि वो ऐसे किन्हीं भी हालातों में उसे मुंहतोड़ जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा आज भी उन्हीं वीर बलिदानियों की पुण्यतिथि जो हमको उन जाबांज सपूतों की बहादुरी ही नहीं शत्रु की कमजोरी भी याद दिलाती है ।             

‘कारगिल विजय दिवस’ पर वीरगति प्राप्त सभी सिपाहियों को मन से नमन... जय हिन्द... जय भारत... वन्दे मातरम... !!!
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© ® सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’
नरसिंहपुर (म.प्र.)
जुलाई २६, २०१९