रविवार, 9 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३१० : #कोचिंग_सेंटर_पूरे_न_करे_गर_वादे #उपभोक्ता_फोरम_से_लड़कर_अपना_हक_मांगें




आये दिन अख़बारों में अनेकों कोचिंग सेंटर ही नहीं विद्यालयों के विज्ञापन अनगिनत सुविधाओं के दावों और आकर्षक ऑफर के साथ प्रकाशित होते रहते जिनसे प्रभावित होकर न जाने कितने पालक अपने व अपने बच्चों के सपनों को पूर्ण करने उनका दाखिला उस संस्थान में करवा देते जिसके लिये वे मनमानी फीस भी वसूल करते लेकिन ऐसे कितने जो इश्तहार में लिखी गयी शर्तों व नियमों का अक्षरशः पालन करते और उम्मीदों पर शत-प्रतिशत खरा उतरते लगभग न के बराबर और उनमें भी ऐसे कितने जो छात्रों की असफलता की जिम्मेदारी लेते और उनको मुआवजा देते शायद, एक भी नहीं

पर, क्या आप ये जानते कि कोई भी कोचिंग सेंटर या कोई भी कम्पनी जो भी अपने उपयोगकर्ताओं या उपभोक्ताओं से वादा करते अगर, वो इसे पूर्ण नहीं करते तो वे उस पर उपभोक्ता फोरम के अंतर्गत मुकदमा कर सकते मगर, ये भी एक सच कि इसका ज्ञान होने के बाद भी कोई ऐसा नहीं करता जिसका नतीजा कि इन कोचिंग सेंटर्स पर लाखों-करोड़ों रूपये फूंकने के बाद भी जब अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होता तब भी कोई इनको दोष न देकर अपने में ही कमी ढूंढता या फिर किस्मत के सर ठीकरा फोड़कर मन को समझा लेता ऐसे में इनकी संख्या व फीस दिन-दिनों बढ़ती जाती

अतः इनकी मनमानियों पर लगाम लगाने ये निहायत जरुरी कि प्रवेश से लेकर अंतिम परिणाम तक हर दस्तावेज को संभालकर रखा जाये और जब ये महसूस हो कि आपकी पूरी मेहनत व सारी कोशिशों के बावजूद भी आपका रिजल्ट मनचाहा इसलिये नहीं आया कि उसमें कुसूर आपका नहीं बल्कि, संस्थान का है जिसने एडमिशन के पूर्व आपसे जो भी वादे किये उनको पूरा नहीं किया जिसका प्रभाव आपके रिजल्ट पर पड़ा तो आपको पूरा हक़ है कि आप अपने पैसे व समय के नुकसान की भरपाई भी उतने ही अधिकारपूर्वक करें जितने अधिकार से उन्होंने आपसे फीस वसूली थी आपको यदि लग रहा कि ये नामुमिकन है तो इस खबर को जरुर पढ़े और पूरा पढ़े तो पता लगेगा कि ये सम्भव है...        

#AIIMS_परीक्षा_में_फेल_हुआ_तो_इंस्टीट्यूट_पर_ठोका_केस_मिले_77_हजार
(एम्स एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर पर छात्र ने चलाया मुकदमा...)

हर साल एम्स में दाखिला लेने के लिए लाखों छात्र एंट्रेंस परीक्षा में शामिल होते हैं चूँकि, ये परीक्षा काफी मुश्किल होती है अतः इसकी तैयारी के लिए छात्र कोचिंग सेंटर्स का सहारा लेते हैं लेकिन, हाल ही में एक ऐसी खबर आई जिसमें एम्स एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी कराने वाले हैदराबाद के कोचिंग सेंटर पर एक 28 साल के डॉक्टर आर शंकर राव ने उपभोक्ता फॉर्म के अंतर्गत मुकदमा कर दिया

डॉक्टर का कहना था कि, ये कोचिंग सेंटर सही से तैयारी नहीं करवा रहा  साथ ही तैयारी कर रहे छात्रों को कक्षा में पढ़ाने के लिए फैकल्टी मेंबर देने में असफल रहा कोचिंग सेंटर की इसी लापरवाही के कारण उनका परीक्षा में प्रदर्शन खराब रहा जिसकी वजह से वह फेल हो गए यहीं नहीं शंकर ने आरोप लगाया कि एम्स एंट्रेंस टेस्ट कोर्स में शामिल होने वाले सभी टॉपिक्स को कोचिंग सेंटर ने कोर्स में शामिल नहीं किया था वह सभी टॉपिक्स को कवर करने में असफल रहे जिसकी वजह से वह एम्स एंट्रेंस टेस्ट को पास नहीं कर पाया और पैसा, समय दोनों ही बर्बाद हो गए

उनके प्रकरण पर जिले के कंज्यूमर फोरम ने कार्यवाही करते हुये उनको कोचिंग सेंटर से 45,000 रुपये वापस करवाये जो उन्होंने कोचिंग की फीस दी थी इसके साथ ही नुकसान भरपाई के लिए 32,000 रुपये का मुआवजा भी दिलवाया न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चिक्कड़पल्ली में 'भाटिया मेडिकल इंस्टीट्यूट' में मेडिकल कोचिंग के लिए दाखिला लेने वाले आर शंकर राव को आश्वासन दिया गया कि उन्हें डॉ देवेश मिश्रा ही उनकी पढ़ाएंगे लेकिन, कोचिंग सेंटर ज्वॉइन करने के बाद शंकर के हाथ निराशा लगी डॉ देवेश मिश्रा एक पैथोलॉजिस्ट हैं, लेकिन उन्होंने एक भी दिन पूरे कोर्स के दौरान क्लास नहीं ली थी

वहीं दूसरी ओर कोचिंग सेंटर ने दावा किया है कि उनके कोचिंग सेंटर की तकनीकों में कोई गलती नहीं थी, साथ ही उन्होंने कभी भी डॉ देवेश मिश्रा को फैक्लटी मेंबर के तौर पर होने का कोई वादा नहीं किया था इस तरह कोचिंग सेंटर ने ये कहते हुए आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने कोर्स में शामिल होने वाले एडिशनल टॉपिक्स को पढ़ाया था फिर भी हैदराबाद कंज्यूमर फोरम 3 ने कहा कि सेंटर शिकायतकर्ता को दिए गए मानकों को प्रस्तुत करने में असफल रहा यानी सेंटर ने अपने छात्र की जरूरत का ख्याल नहीं रखा वहीं अपने आर्डर में कंज्यूमर फोरम ने कहा कि कोचिंग सेंटर को अपने किसी भी छात्र को 'निराश और असंतुष्ट' नहीं करना चाहिए थे ये कोचिंग सेंटर की गलती है

कंज्यूमर फोरम ने ये भी कहा कि इस मुद्दे से संबंधित कोचिंग सेंटर को कई ईमेल लिखे गए थे वहीं अगर सेंटर चाहता तो आवश्यक राशि काटने के बाद शिकायतकर्ता को वापस कर सकता था वहीं कोचिंग सेंटर यदि किसी बात का दावा करते हैं तो उसे अपने वादे को पूरा करना चाहिए था

इसलिये जागो ग्राहक जागो... जागो छात्रों जागो... यदि सेंटर्स को मनचाही फीस देते हो तो मनचाहा परिणाम भी लो और न मिले तो चुप न रहो ताकि, दूसरे उनका शिकार होने से बच जाये क्योंकि, समय के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती फिर भी मुआवजा जख्म पर मरहम तो बन ही सकता है तो ध्यान रहे... दावे-वादे कागजी न हो सरकार की तरह जो एजेंडे में तो हसीन ख्वाब दिखाती पर, हक़ीकत में रुलाती जो झूठे बोले सबको आईना दिखाओ... ☺ ☺ ☺ !!!

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०९ दिसम्बर २०१८

शनिवार, 8 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३०८ : #लघुकथा_नो_पीरियड_लिव




"जूली, आप मिस सोनिया को अंदर भिजवा दीजिये बोलना मैने बुलाया है" लैपटॉप पर काम करते हुये सीनियर मैनेजर मिसेज रमोला सरदाना ने अचानक अपनी सेक्रेटरी से ये बात कही और वापस अपने काम में लग गई ।

कुछ देर बाद डोर पर नॉक हुई और सैंडिल की खट-खट के साथ सोनिया ने चैम्बर में प्रवेश किया तो देखा मैडम अभी भी लैपटॉप पर सर झुकाये कुछ करने में व्यस्त थी ।

आपने मुझे बुलाया मैम...

हां, सोनिया बैठो

वो उनके सामने की चेयर पर बैठ गयी और चुपचाप उनको देखने लगी

तभी उसकी मैडम ने ऊपर नजर उठाई और बोली, सोनिया इस महीने से कम्पनी तुम्हें पीरियड लिव देना बंद कर रही है यही बताने तुमको बुलाया था ।

मैम, अचानक ऐसा निर्णय क्यों? ये तो मेरा अधिकार है जिसे क्यों छीना जा रहा मुझे जानने का पूरा हक है ।

स्युर, व्हाई नॉट इट्स योर राइट टू नो इट... रीजन एकदम क्लियर है मैंने अब तक ली गई तुम्हारी सभी एप्लीकेशन चेक की जिसमें तुमने सिर्फ पीरियड की वजह से छुट्टी नहीं ली बल्कि, इसलिये ली कि तुम्हें बेहद तकलीफ होती और तुम चल-फिर भी नहीं सकती ऐसी ही कई मेडिकल वजहों का जिक्र उनमें तुमने किया है ।

जी, मैम क्योंकि ऐसा ही होता उन दिनों बहुत तकलीफ रहती बिस्तर से उठना तक मुश्किल होता इसलिये मैं हर महीने 2 दिन की विशेष छुट्टी सिर्फ इसके लिये लेती हूं ।

पर, मिस सोनिया अभी मैं आपका फेसबुक अकाउंट देख रही थी जिसमें आपने एक पोस्ट पर लिखा हुआ है कि, "मुझे तो कभी अहसास तक नहीं होता कि कब पीरियड आते और चले भी जाते यहां तक कि सब कुछ हर दिन की तरह इतना सामान्य रहता कि घरवालों तक को पता नहीं चलता कि मुझमें कोई बदलाव है एकदम सहज प्रक्रिया जिसमें ऐसा कुछ भी नहीं कि उसकी वजह से किसी काम में कोई परेशानी हो तो फिर ऐसे में स्त्रियों को पूजा से वंचित करना मुझे समझ नहीं आता जबकि, ये प्रक्रिया न हो तो किसी का जन्म ही न हो अतः इसके नाम पर मंदिर जाने पर रोक लगाना गलत है मैं इसका विरोध करती हूं" ।

इसे पढ़ने के बाद मैंने याद किया कि ऑफिस में सबसे ज्यादा आंदोलन तुमने ही चलवाया था इन दिनों के अवकाश हेतु और खुद का उदाहरण तक दिया था कि इन दिनों तुम्हारी हालत तो जल बिन मछली-सी हो जाती आना असंभव तब सोच-विचार के बाद इस नियम को लागू किया गया और तुम यहाँ दूसरा ही राग अलाप रही तो ऐसे में मैं इसे सच मानकर ये फैसला कर रही हूं ।

मैम, आप मेरी बात तो सुनिये वो जो मैंने फेसबुक पर लिखा वो तो एक अभियान का हिस्सा है जो सब महिलाएं लिखकर पोस्ट कर रही जिसमें सच्चाई कुछ भी नहीं सब मनगढ़ंत है ।

ओह, इसका मतलब तुम एक फेक फेमिना हो जो ऐसी फर्जी पोस्ट डालकर विवाद पैदा करती है फिर तो ये सरासर गलत ही नहीं अपराध भी है और तुम जैसी झूठी महिलाओं की वजह से ही औरतों को उनका हक़ नहीं मिलता इसलिये सिर्फ तुम्हारी लिव ही नहीं नौकरी भी खत्म हो जाना चाहिये... नाउ यू कैन गो ।

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०८ दिसम्बर २०१८

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३०७ : #मनाओ_सशस्त्र_सेना_झंडा_दिवस #सैनिकों_के_कल्याण_हेतु_करो_निवेश




8 साल का नन्हा यश स्कूल से घर आते ही बोला, "मां, हमारे स्कूल में मैडम ने सबको कल १०लाने को कहा है"

माँ उसके स्कूल बैग से लंच बॉक्स निकालते हुए बोली, "क्यों?" तो वो उनको समझाने लगा कि, "मम्मा, वो एक स्टिकर दे रहे जिस पर झंडा बना है मेरे सब दोस्तों ने लिया तो मैं भी लूंगा प्लीज़ आप कल पैसे दे देना"

उसकी बात सुनकर मां मुस्कुराते हुए बोली, "उस स्टिकर का मतलब पता है तुम्हें वो क्यों देते है" तो वो तपाक से बोला, "नहीं मम्मी, आप ही बताओ क्यों देते है" तब उसकी माँ उसे बताने लगी, "बेटा, आपको ये तो पता है न कि हमारे देश की रक्षा सैनिक करते और यदि वे न हो तो हम अपने घरों में चैन से नहीं रह सकते" तो वो तुरंत अपने नन्हे हाथों से बन्दूक का पोज बनाकर ठांय-ठांय की आवाज़ निकालकर बोला, "हां मां, ये तो मुझे अच्छे से पता और एक दिन मैं भी अपने देश के लिये जरूर कुछ करुंगा"

उसकी बात सुनकर मां ने उसको गले से लगते हुये कहा, 'जरूर करोगे यदि अभी से उसकी तैयारी करोगे तो मैं बता रही थी कि हमारे जो सैनिक देश की सरहद पर हमारे लिए दुश्मनों से लड़ते हमारी हिफाज़त करते उनके प्रति हमारा भी तो कोई फ़र्ज़ बनता है या नहीं"

वो बोला, "मां क्यों नहीं बनता हमसे जो बन पड़े हमें उनका सहयोग करना चाहिये" तो वो आगे बोली, "यश, यही सोचकर तो हमारे देश में 7 दिसम्बर को #सशस्त्र_सेना_झण्डा_दिवस मनाया जाता जिसके लिए प्रतीक स्वरुप ये स्टिकर दिये जाते ताकि, जो भी राशि एकत्रित हो वो उनके परिवार वालों को दी जा सके और इस तरह से हम सब भी उनकी मदद में शामिल हो सकें । तुम्हें ये भी जानना चाहिये कि जब हमारा देश आजाद हुआ उसके बाद 1949 से इसे #झण्डा_दिवस के रूप में मनाते थे पर, 1993 से इसे ये नाम दे दिया गया । इससे जो राशि एकत्रित होती उसे युद्ध में शहीद होने वाले व सेवारत वीरों के परिवार वालों के कल्याण हेतु खर्च किया जाता है"

उनकी बात सुनकर यश खुश हो गया कि, ये तो बड़ा अच्छा काम है मैं देश के सिपहियों के लिये ये झण्डा जरूर लूंगा और अपने बाकी दोस्तों को भी ये बात बताऊंगा कि, वो चॉकलेट नहीं झण्डा खरीदे और वो खुशी-खुशी गाने लगा... नन्हा-मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं, बोलो मेरे संग... जय हिन्द... जय हिन्द... ☺ ☺ ☺ !!!

#बच्चों_को_जागरूक_करें
#हर_दिवस_का_इतिहास_कहें

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०७ दिसम्बर २०१८

गुरुवार, 6 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३०७ : #मकड़जाल



इक,
'मकड़जाल'
ही तो है
ये ज़िंदगी
आप अपने को ही
लीलती रहती है
ये ज़िंदगी...
.....
रोज बुनती है
कुछ नया
रोज मिटाती है
कुछ पुराना
रोज ही कुछ इस तरह
बनती-बिगड़ती है
ये ज़िंदगी...
....
और,
एक दिन
उलझकर अपने ही
बुने जाल में  
फंसकर अपनी ही
बिछाई हुई बिसात में
खत्म हो जाती है
ये ज़िंदगी...
.....
सच,
एक मकड़जाल ही तो है
ये ज़िंदगी ।।
..........

#ज़िंदगी_बनाम_मकड़ी

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०६ दिसम्बर २०१८

बुधवार, 5 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३०५



#दीपिका_प्रियंका_ने_भी_किया_विवाह
#फेक_फेमिनाओं_का_ हुआ_दिमाग_ खराब
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दीपिका-रणवीर की शादी के बाद उनकी ब्याह की पहली तस्वीर जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुई उसके इंतज़ार में बैठी फेमिनाओं के दिल पर मानो बिजली गिरी जैसे ही उन्होंने उसे ज़ूम किया उसकी चुनरी पर लिखा #सदा_सौभाग्यवती_भवः दिखा फिर तो समझो जैसे कोई बम ही फटा लगी बौराने कि इसका क्या मतलब, ये आशीर्वाद किसे दिया गया है पर, वो दीपिका जो माय_लाइफ_माय_चॉइस की पैरवी करती उससे पूछने की किसी की हिम्मत न हुई कि कहीं यही जुमला मुंह पर मार दिया तो फिर क्या खाक इमेज रह जायेगी तो बेचारी खून का घूंट पीकर खामोश रह गयी

उन्हें उससे ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी अनुष्का, सोनम, नेहा धूपिया पहले ही दिल तोड़ चुकी इसलिये सदमा थोड़ा ज्यादा हुआ कि हमारी गैंग से एक फेमिना कम हुई जो अब तक बिंदास रहती थी एक अफेयर के ब्रेक होने के बाद ही इतनी संजीदा और गंभीर हो गई कि दूसरा चांस लेने से बेहतर शादी का विकल्प चुना और शादी भी इतनी परंपरावादी कि हर रस्म ही नहीं निभाई दो-दो रीति-रिवाजों से उसे रचाई याने कि जितना इन फेमिनाओं के मंसूबों पर पानी फेर सकती थी उससे बढ़कर किया और इतने तो रिसेप्शन दिए कि वे देखती ही रह गयी

उनके गुस्से की वजह ये थी कि अब अपनी रोल मॉडल को विवाह करते देख बाकी भी उसके पदचिन्हों पर चले तो सारी मेहनत बेकार जायेगी जो वो अब तक विवाह संस्था को बेकार, बेमानी साबित करने में खर्च कर चुकी यहाँ तक कि विवाह के तमाम चिन्हों को त्याग कर अपने आपको अति-आधुनिक तक दिखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी और जो कमी रह गयी तो बच्चों को जन्म देना या उनका पालन-पोषण करने जैसे कामों पितृसत्ता के मत्थे मढ़कर खुद के नारीत्व, मातृत्व तक को दरकिनार कर पुरुषों की बराबरी का नया रास्ता खोज लिया पर, ये सब तो उनके उस कमजोर ढांचे को गिराने में लगी है

ऐसे में उन्होंने प्रियंका से अपनी बची-खुची उम्मीद जोड़ ली कि वो भले देसी गर्ल है पर, लड़का विदेशी वो भी उम्र में खुद से कम ढूंढा है तो जरूर हमारी अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी पर ये क्या उसने तो न केवल अपने देश में आकर बल्कि, बिल्कुल पारंपरिक तरीके से विधिवत शादी की पहले बकायदा रोका, फिर एंगेजमेंट और बेचलर पार्टीज तक कर डाली जो यहाँ संभव नहीं तो विदेश में ही कर ली फिर यहाँ आकर बाकी की रस्में निभाई मेहँदी, संगीत आदि और जोर-शोर से शादी की

उसके बाद बड़ा-सा सिंदूर लगाकर उसने अपनी फोटोज शेयर की जिसे देखकर वे जब उसको कुछ कह न सकी तो शादी के शाही खर्चे और उसमें फूटने वाली आतिशबाजी पर ही अपना गुस्सा निकालने लगी ये कहकर ही एक-दूसरे को तसल्ली देने लगी कि ये नायिकाएं तो ऐसी ही होती है बातें कुछ करेंगी और काम उसके विपरीत करेंगी ये कोई फेमिनाएँ है क्या हुंह...

अब उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि वे किस तरह से विवाह संस्था को गैर जरूरी सिद्ध करें तो वही घिसा-पिटा राग छेड़ दिया कि इनकी शादी तो महज दिखावा है चार दिन की चांदनी इनके चक्कर मे आकर क्या फैसला लेना इन्हें तो कोई फर्क पड़ता नहीं आज इनकी शादी की वजह से अब ने जाने कितनी लड़कियां शादी करेंगी और बड़े-से बड़े आयोजन में रुपया पैसा बहेगा उसके बाद इनका क्या ये तो सिंदूर श्रृंगार में एक-दो पोज खींचा लेंगी पर हमें तो बातें सुनानी पड़ेगी तो यही ठीक है कि इनकी शादी को तमाशा घोषित कर दो तो सबने सामूहिक रूप से वही करना शुरू कर दिया

उधर वो लोग रिसेप्शन पर रिसेप्शन दिए जा रही फोटोज खिंचवाए जा रही जबकि, फेमिनिज्म का ये कतई मतलब नहीं कि शादी न करो या परंपराओं को ठुकराओ या सिंदूर न लगाओ या माँ न बनो और बच्चे न पालो बल्कि, उसके वास्तविक मायने कि लड़की या औरत होते हुए ही पुरुषों के बराबर समानता हासिल करो न कि मर्द ही बन जाओ उस हिसाब से दोनों ने फेमिनिज्म को विस्तार ही दिया उसका आयाम बढ़ा दिया कि शादी के साथ भी उसे निभाया जा सकता बरकरार रखा जा सकता है क्योंकि, दुनिया और आदमियों को उन्होंने इन सबके बनिस्बत ज्यादा देखा तो अपने अनुभवों के बाद उनको जो सही लगा वही कदम उठाया और ये किस तरह का फेक फेमिनिज्म जिसमें महिला ही महिला को अपमानित करती याने कि जो बात वे दूसरों के लिये कहती कि औरत ही औरत की दुश्मन होती वो इस तरह की हरकतों से उन पर भी लागू होती है

खैर, फेक फेमिनिज्म और फेक फेमिनाओं के मसले तो वैसे भी ज्यादातर फालतू के कैम्पेन में ही उलझे रहते ऐसे में दोनों को शादी की बधाई और आशीर्वाद सदा सौभाग्यवती भवः… ☺ ☺ ☺ !!!

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०५ दिसम्बर २०१८

मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३०४ : #रात_दिन_जलता_हूँ #फिर_भी_नहीं_बुझता_हूँ




रात और दिन
अनवरत जलता हूँ
फिर भी नहीं बुझता हूँ
कि, मैं सूरज की तरह
दुनिया को रोशन करता
भटकों को राह दिखाता हूँ

मैं कौन ???

'सत्य'
जिसे खत्म करने
जिससे बचने का हर कोई
जतन करता हैं

लेकिन...
मैं न तो झुकता
और न ही मिटता हूँ
समय आने पर
स्वतः ही उजागर होता हूँ

मेरे साथ
चलने वालों और
मुझे मानने वालों को
मैं कभी न झुकने देता हूँ

भले लगे कि
असत्य जीत गया
सच का बोलबाला नहीं रहा
पर, कभी भी किसी भी हाल
मैं पराजित नहीं होता हूँ ।।

#सत्यमेव_जयते

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०४ दिसम्बर २०१८

सोमवार, 3 दिसंबर 2018

सुर-२०१८-३०३ : #अ_सामान्य_होना_बुरा #अ_साधारण_होना_अच्छा_होता



शब्दों का सही प्रयोग ही उसके अर्थ को सही तरीके से प्रेषित करता है और यही वजह कि ‘विकलांग’ के लिये अब ‘दिव्यांग’ शब्द प्रयुक्त किया जाने लगा जो दर्शाता कि ‘विकलांगता’ जहाँ शरीर की किसी विकृति विशेष को इंगित करता वहीँ ‘दिव्यांग’ शब्द व्यक्ति में किसी दिव्य शक्ति के होने का अहसास कराता है

इस तरह वह व्यक्ति स्वतः ही विशिष्ट बन जाता जिसके साथ ये शब्द जुड़ जाता क्योंकि, अब तक तो किसी के भीतर या बाहर किसी भी तरह की कमी के पाये जाने पर उसको झट ‘अ-सामान्य’ कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता था जैसे कि ‘सामान्य’ होने से सब कुछ सहज-सरल हो जाता जबकि, संघर्ष तो सबके जीवन में होता चाहे वो सम्पूर्ण हो या उसमें कहीं कोई कमी हो

फिर भी अंतर ये हो जाता कि जहाँ सामान्य व्यक्ति ये सोचकर निश्चिन्त हो जाता कि उसे तो ईश्वर की कृपा से सब हासिल तो आगे भी इसी तरह उसे सब कुछ बड़ी आसानी से मिल जायेगा दूसरी तरफ जो अभाव के साथ जन्मे वे बड़ी जल्दी ये जान लेते कि वे सबसे अलग तो उनका संघर्ष भी अलग होगा और यही सोच उनकी ताकत बन जाती जो उन्हें असामान्य से असाधारण बना देती है

यही फर्क शब्दों को भी अलग मायने देता और उसे अपनाने वालों को भी अमूमन हम यही सुनते कि फलाना ‘एब्नार्मल’ है जो उसके सामान्य न होने को दर्शाता गोया कि सामान्य होना बहुत बड़ी बात जो अक्सर, सुनने वाले के मन में हीन भावना भर देती पर, यदि उसे ये अहसास हो जाये कि वो सबसे अलग इस मायने में नहीं कि उसमें कोई कमी बल्कि, इसलिये कि सामने वाला सम्पूर्ण होकर भी दूसरे की अपूर्णता पर टीका-टिप्पणी कर रहा जबकि, वो अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर अपनी दैहिक-मानसिक रिक्तता को भरने में लगा हुआ है

अपनी ऐसी प्रबल सकारात्मक सोच के दम पर ही न जाने कितने दिव्यांगों ने ऐसे अद्भुत कारनामे कर दिखाये जो बहुत-से सामान्य लोग भी नहीं कर पाए और ये साबित कर दिया कि ये महज एक नजरिया अन्यथा अपनी किस्मत केवल हाथ या पैरों से नहीं कर्मों से ही लिखी जाती और वो तो हर हाल में संभव है केवल उनके लिये ही नहीं जो कुछ करने की बजाय सोचते ही रहते है

आज ‘अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस’ पर यही शुभकामना कि सभी दिव्यांग अपनी दिव्यता से सफलता की हर ऊँचाई को छुये और जहाँ उनको मदद की आवश्यकता हो हम उनके साथ खड़े होकर उनमें कमतरी नहीं बहादुरी का जज्बा पैदा करें यही इस दिवस पर सबसे अनुरोध है हमें उनके भीतर ‘असामान्य’ नहीं ‘असाधारण’ होने का भाव जगाना है... यही इस दिवस की सार्थकता भी तो है... है न... ☺ ☺ ☺ !!!

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© ® सुश्री इंदु सिंह इन्दुश्री
नरसिंहपुर (म.प्र.)
०३ दिसम्बर २०१८